National Journal of Advanced Research

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Vol. 2, Issue 6 (2016)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी के अहिंसात्मक दृष्टिकोण की प्रासंगिकता


विवेक पाठक

महात्मा गांधी के विचारों में अहिंसा का महत्व सिर्फ कुछ क्षणों के लिए न हों करके बल्कि एक लंबी प्रक्रिया तक चलने वाली निरंतर लड़ाई थी जहां हिंसा कुछ क्षणों के बाद अपना दम तोड़ देती तो वहीं अहिंसा के जरिये एक निश्चित सफलता पायी जा सकती है इस बात से बिल्कुल भी इंकार नहीं किया जा सकता है, मनुष्य का प्रारम्भिक दौर हिंसक गतिविधियों से भरा रहा है और हिंसा के बल पर ही अपने को युगों युगों से स्थापित करता आ रहा है लेकिन हिंसा के साथ सत्य, दर्शन, अहिंसा, न्याय और शांति जैसे महत्वपूर्ण साधन भी विकसित होते रहे है जिन्हे नकारा नहीं जा सकता है। आज के बदलते परिवेश में हिंसा यदि बढ़ी है तो उसे रोकने का काम भी अहिंसा के द्वारा ही किया जा सकता है। आगे प्रस्तुत पेपर में इन्ही सब बातों पर विस्तारपूर्वक चर्चा किया जायेगा की हिंसा की तुलना मे अहिंसा का कितना महत्व हैं?
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